आइना

बहुत देर बाद आज फ़ुर्सत के पल थे सोचा चलो ख़ुद को सवाँर लूँ मैं आइने के सामने ख़ुद को निहार लूँ सिमटीं सहमी जब मैं आइने के सामने खड़ी होई तो आइने ने मुँह फेर लिया मुझे पहचाने से इंकार कर दिया मैंने बौखला कर कहा,”अरे यह मैं ही तो हूँ तेरे बचपन की … Continue reading आइना