कुछ पल

मैं अपने हिस्से की ज़िंदगी जीना चाहती हूँ मैं जहाँ मैं सिर्फ़ मैं हूँ माँ पत्नी बेटी बहु से कुछ लम्हे चुराना चाहती हूँ इस छोटी सी ज़िंदगी में मैं अपने आप को खोजना चाहती हूँ इस शोर के जंगल से दूर दौड़नाचाहती हूँ अधर के उस सन्नाटे से लिपटना चाहती हूँ रेत की तरह … Continue reading कुछ पल